कानपुर में कांग्रेस ग्रामीण के नेतृत्व में एक विरोध मार्च निकाला गया, जिसे पुलिस ने रोक दिया। यह घटना कोठीवाली चौराहे पर हुई, जहाँ कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने से रोका गया। इस दौरान कांग्रेस ग्रामीण के जिलाध्यक्ष भी मौजूद थे, जिन्होंने इस कार्रवाई की निंदा की। बताया गया है कि यह मार्च किसी विशिष्ट स्थानीय मुद्दे को लेकर निकाला गया था, जिसके लिए कार्यकर्ताओं ने एकत्रित होकर अपना विरोध प्रदर्शन शुरू किया था। जैसे ही मार्च कोठीवाली चौराहे की ओर बढ़ने लगा, पुलिस ने कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए कानूनी प्रक्रिया का हवाला दिया। पुलिस का कहना था कि भीड़ को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया। जिलाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार के दबाव में यह कार्रवाई की गई है और विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण था। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने बिना किसी उचित कारण के उनके लोकतांत्रिक अधिकार को बाधित किया है। जिलाध्यक्ष ने कहा, 'हमारा उद्देश्य जनता की समस्याओं को उठाना था, लेकिन पुलिस ने बिना किसी कारण के हमारे अधिकार को बाधित किया। यह लोकतंत्र की हत्या है। हम शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जारी रखेंगे।' स्थिति को देखते हुए पुलिस ने कार्यकर्ताओं को कोठीवाली चौराहे पर ही रोक दिया। इसके बाद पुलिस ने उन्हें समझाने की कोशिश की और कुछ समय के लिए हिरासत में भी लिया। यह घटना शहर में राजनीतिक हलचल को दर्शाती है, जहाँ सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच अक्सर ऐसी झड़पें होती रहती हैं। पुलिस का कहना है कि वे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई कर रहे हैं। यह घटना राजनीतिक कार्यकर्ताओं और प्रशासन के बीच बढ़ते तनाव को उजागर करती है। कोठीवाली चौराहे पर कार्यकर्ताओं की संख्या अधिक होने के कारण पुलिस को स्थिति को संभालने के लिए अतिरिक्त बल लगाना पड़ा। इस घटना के बाद शहर में तनाव का माहौल बना हुआ है। कांग्रेस ग्रामीण के कार्यकर्ताओं ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है और कहा है कि वे जल्द ही फिर से विरोध प्रदर्शन शुरू करेंगे। यह घटना राजनीतिक विरोध और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच चल रहे संघर्ष का एक स्पष्ट उदाहरण है।