वर्तमान में, IIT कानपुर का प्रोफेसर इस तूफान के केंद्र में है। संस्थान की साख को इस विवाद से गहरा आघात लगा है। यह मामला शैक्षणिक संस्थानों में आंतरिक तंत्र की आवश्यकता और संकाय सदस्यों के लिए आचरण के कड़े नियमों के महत्व को रेखांकित करता है। सभी की नजरें अब आगे के घटनाक्रमों पर टिकी हैं, क्योंकि समुदाय और बाहरी दुनिया यह जानने के लिए उत्सुक है कि इस मामले का अंतिम परिणाम क्या होगा और संस्थान इस संकट से उबरने के लिए क्या कदम उठाएगा।