प्रयागराज: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के प्रयागराज शहर में जलभराव की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रशासन को कड़ा निर्देश दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि 48 घंटे के भीतर शहर से पानी की निकासी सुनिश्चित की जाए, अन्यथा कड़े कदम उठाए जाएंगे। यह आदेश शहर में पिछले कई दिनों से जारी भारी वर्षा और गंगा-यमुना के बढ़ते जलस्तर के कारण उत्पन्न संकट के संदर्भ में आया है। न्यायालय की यह टिप्पणी स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठाती है और तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता पर बल देती है। उधर, सोनभद्र जिले में स्थित रिहंद बांध की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। बांध का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है, जिसके कारण पहली बार बांध के 14 फाटकों को एक साथ खोलना पड़ा है। यह एक ऐतिहासिक घटना है क्योंकि रिहंद बांध के इतने अधिक फाटकों को एक साथ खोलने का यह पहला अवसर है। बांध से पानी छोड़ने के कारण निचले क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है और प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में अलर्ट जारी कर दिया है। बांध प्रबंधन ने चेतावनी दी है कि यदि जलस्तर और बढ़ता है, तो और अधिक फाटकों को खोलने की आवश्यकता पड़ सकती है। प्रयागराज में जलभराव की स्थिति ने आम नागरिकों के जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। कई मोहल्लों में घुटनों तक पानी भर गया है, जिससे लोगों को अपने घरों से बाहर निकलने में कठिनाई हो रही है। प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्यों के लिए टीमें तो तैनात की गई हैं, लेकिन स्थिति अभी भी नियंत्रण से बाहर बनी हुई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि हर साल मानसून के दौरान यही समस्या उत्पन्न होती है, लेकिन प्रशासन की ओर से स्थायी समाधान नहीं निकाला जा रहा है। उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद अब प्रशासन सक्रिय हुआ है और जल निकासी के लिए पंपों और अन्य उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है। लखनऊ में भी मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों के लिए भारी वर्षा का अलर्ट जारी किया है। राज्य सरकार ने सभी जिलों के जिलाधिकारियों को सतर्क रहने और आवश्यक तैयारी करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की है और प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों को तेज करने के आदेश दिए हैं। सरकार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए वित्तीय सहायता की घोषणा की है और आपदा प्रबंधन टीमों को स्टैंडबाय पर रखा गया है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी नियोजन में सुधार और जल निकासी तंत्र को मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता है। प्रयागराज जैसे शहरों में अतिक्रमण और अवैध निर्माण ने जलभराव की समस्या को और गंभीर बना दिया है। सोनभद्र में बांध प्रबंधन के नियमों में सुधार की भी आवश्यकता है ताकि अचानक पानी छोड़ने से निचले क्षेत्रों में नुकसान न हो। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि आधुनिक तकनीक और बेहतर पूर्वानुमान प्रणाली का उपयोग करके आपदा प्रबंधन को और प्रभावी बनाया जा सकता है। वर्तमान में प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग स्थिति पर निरंतर नजर रखे हुए हैं। प्रयागराज में जल निकासी के लिए अतिरिक्त पंप लगाए जा रहे हैं और प्रभावित क्षेत्रों में राहत शिविर स्थापित किए गए हैं। सोनभद्र में बांध के फाटकों की निगरानी 24 घंटे की जा रही है और निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा गया है। मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक वर्षा जारी रहने की संभावना है, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है। ऐसे में प्रशासन की तैयारी और उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन ही स्थिति को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।