हरदोई जिले के रसूलपुर ब्राह्मनान गांव में नीतू द्वारा ढोलक और गीत सिखाकर जीविका चलाने का एक अनूठा प्रयास सामने आया है। यह पहल न केवल उनके स्वयं के आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बनी है, बल्कि गांव की अन्य लड़कियों के लिए कौशल विकास का एक महत्वपूर्ण केंद्र भी साबित हो रही है। नीतू ने अपने समुदाय में एक सकारात्मक बदलाव लाने के लिए इस कलात्मक मार्ग को चुना है, जो स्थानीय स्तर पर महिलाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर उत्पन्न कर रहा है। इस प्रयास से गांव की कई युवतियों को एक नई दिशा मिल रही है और वे भी अपनी प्रतिभा को निखारने में सक्षम हो रही हैं। यह खबर स्थानीय स्तर पर महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास की एक बेहतरीन मिसाल पेश करती है। गांव के लोग भी इस पहल से काफी उत्साहित हैं और नीतू के इस कार्य की सराहना कर रहे हैं। इस तरह के कदम समाज में महिलाओं की स्थिति को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं। नीतू का यह सफर दर्शाता है कि यदि सही मार्गदर्शन और अवसर मिले, तो महिलाएं किसी भी क्षेत्र में अपनी पहचान बना सकती हैं। उनके द्वारा सिखाई जा रही ढोलक और गीतों की कला ने गांव के सांस्कृतिक परिवेश को भी समृद्ध किया है। यह न केवल एक पेशा है, बल्कि एक सामाजिक जिम्मेदारी भी है जिसे वे पूरी निष्ठा के साथ निभा रही हैं। गांव की अन्य लड़कियां भी अब उनके साथ जुड़कर इस कला को सीख रही हैं, जिससे उनके आत्मविश्वास में वृद्धि हो रही है। यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी सहायक सिद्ध हो सकती है। महिलाओं को जब अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर मिलता है, तो पूरा परिवार और समाज प्रगति की ओर अग्रसर होता है। नीतू का यह कार्य इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। स्थानीय प्रशासन और समाज के अन्य लोगों को भी ऐसे ही प्रयासों को बढ़ावा देना चाहिए ताकि अधिक से अधिक महिलाएं इसका लाभ उठा सकें। यह खबर हरदोई जिले के अन्य गांवों के लिए भी एक प्रेरणास्रोत बन सकती है।
रसूलपुर ब्राह्मनान की नीतू ढोलक-गीत सिखाकर चला रहीं जीविका, गांव की लड़कियों को भी बना रहीं हुनरमंद

Share this story