कानपुर।
सिनेमा में आमतौर पर मनोरंजन, रोमांच और ग्लैमर को प्राथमिकता दी जाती है, लेकिन कभी-कभी कोई फिल्म ऐसी भी आती है जो पर्दे से निकलकर सीधे दर्शक के मन तक पहुंचती है। ‘हनुमान अंश’ ऐसी ही फिल्म है। नीम करोली बाबा के जीवन और उनकी आध्यात्मिक यात्रा से प्रेरित यह फिल्म सिर्फ एक संत की कहानी नहीं, बल्कि ईश्वर की खोज, भक्ति, त्याग, सेवा और मानवता के भाव को सामने रखने वाली सिनेमाई प्रस्तुति है।
फिल्म की कहानी लक्ष्मीनारायण के जीवन से शुरू होती है, जो आगे चलकर श्रद्धालुओं के बीच नीम करोली बाबा यानी महाराज जी के नाम से प्रसिद्ध हुए। बचपन में मां को खोने के बाद उनके मन में ईश्वर को जानने की जिज्ञासा पैदा होती है। यही जिज्ञासा उन्हें सांसारिक जीवन से दूर आध्यात्मिक खोज की ओर ले जाती है। जंगलों, पहाड़ों, नदियों और मंदिरों के बीच उनकी साधना और आत्ममंथन को फिल्म में भावनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
कहानी की सबसे बड़ी ताकत
‘हनुमान अंश’ की सबसे बड़ी खूबी यह है कि फिल्म केवल चमत्कारों को दिखाने पर निर्भर नहीं रहती, बल्कि सेवा को साधना का माध्यम बताती है। फिल्म का संदेश साफ है कि भगवान की तलाश केवल मंदिरों या एकांत में नहीं, बल्कि जरूरतमंद इंसान की सेवा में भी की जा सकती है।
यही विचार फिल्म को सामान्य धार्मिक फिल्मों से अलग करता है।
अभिनय
नीम करोली बाबा की भूमिका में शोभिनव सत्या ने प्रभावशाली काम किया है। खासकर बाबा के शांत, गंभीर और आध्यात्मिक व्यक्तित्व को पर्दे पर उतारना आसान नहीं था। उनके अभिनय में संवादों से ज्यादा हाव-भाव और मौन प्रभाव पैदा करता है। फिल्म में चंदन आनंद, पूर्णिमा तिवारी और अन्य कलाकारों ने भी अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय किया है।
संगीत और वातावरण
फिल्म का संगीत इसकी आध्यात्मिकता को और मजबूत करता है। ब्रज, अवधी और बुंदेली जैसी भारतीय लोकभाषाओं का इस्तेमाल फिल्म को जमीन से जोड़ता है, जबकि बैकग्राउंड स्कोर में भक्ति और भावनात्मकता का अच्छा संतुलन देखने को मिलता है।
कहां थोड़ी कमजोर पड़ती है फिल्म?
फिल्म का विषय गंभीर और आध्यात्मिक है, इसलिए जिन दर्शकों को तेज रफ्तार कहानी, लगातार रोमांच या मसाला मनोरंजन पसंद है, उन्हें फिल्म की गति कुछ जगह धीमी लग सकती है। कई प्रसंगों में फिल्म भावनाओं और आध्यात्मिक संदेश पर अधिक समय देती है।
लेकिन यही धीमापन इस फिल्म के उद्देश्य के अनुरूप भी है। ‘हनुमान अंश’ को केवल मनोरंजन की कसौटी पर देखना शायद इसके मूल भाव के साथ न्याय नहीं होगा।
दर्शकों की प्रतिक्रिया और बॉक्स ऑफिस
फिल्म की शुरुआत बहुत बड़ी ओपनिंग के साथ नहीं हुई, लेकिन बाद में माउथ-ऑफ-वर्ड ने इसकी तस्वीर बदल दी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार करीब ₹2 करोड़ के बजट में बनी फिल्म ने तीसरे सप्ताह में जबरदस्त उछाल दर्ज किया और 23 दिनों में करीब ₹27 करोड़ तक पहुंच गई। यही वजह है कि इसे साल की अप्रत्याशित स्लीपर हिट फिल्मों में गिना जा रहा है।
हमारा फैसला
‘हनुमान अंश’ उन फिल्मों में है जिन्हें देखने के बाद दर्शक केवल यह नहीं सोचता कि फिल्म कैसी थी, बल्कि यह भी सोचता है कि जीवन में आस्था, सेवा और मानवता का वास्तविक अर्थ क्या है।
यह फिल्म चमत्कार दिखाने से ज्यादा विश्वास जगाने की कोशिश करती है। अभिनय, संगीत, भावनात्मक प्रसंग और आध्यात्मिक संदेश मिलकर इसे एक ऐसी फिल्म बनाते हैं जिसे परिवार के साथ देखा जा सकता है।
अगर आप आध्यात्मिक और भावनात्मक सिनेमा पसंद करते हैं तो ‘हनुमान अंश’ को जरूर देखें।
फिल्म रेटिंग: ⭐⭐⭐⭐½/5