हमिरपुर में एक पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में जाकर शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें उसने एक हिस्ट्रीशीटर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित का कहना है कि हिस्ट्रीशीटर ने स्थानीय पुलिस के साथ साठगांठ कर उसके खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज कराने की साजिश रची है। यह घटना जिले के कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है और यह दर्शाती है कि कैसे शक्तिशाली आपराधिक तत्व कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग कर सकते हैं। पीड़ित की यह कार्रवाई पुलिस विभाग के शीर्ष अधिकारी तक अपनी बात पहुँचाने का एक प्रयास है, क्योंकि उसे लगता है कि स्थानीय पुलिस स्टेशन में उसकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं हो रही है या उसे डराया-धमकाया जा रहा है। पीड़ित ने अपनी शिकायत में विस्तार से बताया है कि वह हिस्ट्रीशीटर और उसके साथियों द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न का शिकार है। उसने आरोप लगाया कि हिस्ट्रीशीटर, जिसका आपराधिक रिकॉर्ड रहा है, उसे झूठे केस में फंसाने के लिए सक्रिय रूप से योजना बना रहा है। पीड़ित के अनुसार, यह केवल एक व्यक्ति की साजिश नहीं है, बल्कि इसमें कई लोग शामिल हैं जो पुलिस विभाग के कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। हिस्ट्रीशीटर का डर और उसकी पहुंच का उपयोग पीड़ित को परेशान करने और उसे झूठे मुकदमे के डर से दबाने के लिए किया जा रहा है। पीड़ित ने कहा कि हिस्ट्रीशीटर उसे झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देता रहता है और अब उसने पुलिस अधीक्षक से निष्पक्ष जांच की मांग की है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया अत्यंत महत्वपूर्ण है। पुलिस अधीक्षक जिले की कानून व्यवस्था के लिए जिम्मेदार शीर्ष अधिकारी होते हैं। पीड़ित का एसपी कार्यालय पहुँचना यह दर्शाता है कि उसे स्थानीय पुलिस स्टेशन से न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है। यह स्थिति तब और चिंताजनक हो जाती है जब आरोपी एक हिस्ट्रीशीटर हो, जिसका अर्थ है कि उसका आपराधिक इतिहास पुराना है और वह स्थानीय पुलिस पर अपना प्रभाव रखता है। पीड़ित ने कहा कि हिस्ट्रीशीटर और उसके साथियों का पुलिस अधिकारियों के साथ गहरा नाता है, जिसकी वजह से वह स्थानीय स्तर पर अपनी शिकायत दर्ज कराने में असमर्थ रहा है। इस मामले में हिस्ट्रीशीटर की भूमिका विशेष रूप से चिंताजनक है। हिस्ट्रीशीटर वह व्यक्ति होता है जिसका आपराधिक रिकॉर्ड दर्ज होता है और वह बार-बार अपराध करता है। हिस्ट्रीशीटर का किसी निर्दोष व्यक्ति के खिलाफ साजिश रचने का आरोप यह दर्शाता है कि वह न केवल स्वयं अपराध कर रहा है, बल्कि कानून के दुरुपयोग के माध्यम से दूसरों को भी परेशान कर रहा है। पीड़ित का डर समझ में आता है क्योंकि हिस्ट्रीशीटर की पहुंच और डर का माहौल स्थानीय जनता को दबाए रखता है। हिस्ट्रीशीटर का यह कृत्य कानून के शासन को चुनौती देता है और यह दर्शाता है कि कैसे आपराधिक तत्व व्यवस्था का लाभ उठाकर अपनी शक्ति को और बढ़ाते हैं। साठगांठ का आरोप इस मामले को और भी जटिल बनाता है। पीड़ित का दावा है कि हिस्ट्रीशीटर ने अकेले काम नहीं किया है, बल्कि उसने पुलिस विभाग के कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर यह पूरी योजना बनाई है। यदि यह आरोप सच है, तो यह पुलिस विभाग के भीतर भ्रष्टाचार के गहरे जाल को उजागर करता है। पुलिस विभाग के कुछ अधिकारियों का हिस्ट्रीशीटर के साथ मिलकर झूठा केस दर्ज करना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि न्याय के साथ भी खिलवाड़ है। पीड़ित की शिकायत के बाद पुलिस विभाग पर अब यह जिम्मेदारी है कि वह इस मामले की निष्पक्ष जांच करे और हिस्ट्रीशीटर तथा उसके साथियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे। पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत दर्ज होने के बाद अब पुलिस विभाग की जिम्मेदारी है कि वह त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई करे। पुलिस अधीक्षक को पीड़ित की शिकायत की प्रारंभिक जांच करानी चाहिए और हिस्ट्रीशीटर तथा उसके साथियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया (prima facie) साक्ष्य मिलने पर एफ आई आर (FIR) दर्ज करानी चाहिए। पुलिस विभाग को यह भी जांचना चाहिए कि क्या हिस्ट्रीशीटर ने वाकई पीड़ित के खिलाफ झूठा केस दर्ज कराया है। यदि ऐसा है, तो हिस्ट्रीशीटर और उन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए जिन्होंने झूठा केस दर्ज किया है। पुलिस विभाग की छवि अब इस बात पर निर्भर करती है कि वह इस मामले में कितनी ईमानदारी से कार्रवाई करती है। यदि पुलिस विभाग हिस्ट्रीशीटर के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता है, तो यह जनता के विश्वास को और कम करेगा और अपराधियों के हौसले बुलंद करेगा। इस मामले में पीड़ित के पास कानूनी उपचार के अन्य विकल्प भी मौजूद हैं। यदि पुलिस अधीक्षक की कार्रवाई से पीड़ित संतुष्ट नहीं होता है, तो वह वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) या राज्य मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज करा सकता है। इसके अलावा, वह न्यायालय में भी याचिका दायर कर सकता है। पीड़ित की यह कार्रवाई अन्य पीड़ितों के लिए भी एक संदेश है कि वे पुलिस विभाग के शीर्ष अधिकारियों से संपर्क करने से न डरें। हालांकि, पीड़ित के लिए यह रास्ता आसान नहीं है और उसे कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन न्याय के लिए संघर्ष करना ही एक लोकतांत्रिक समाज की पहचान है। पुलिस विभाग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हिस्ट्रीशीटर और उसके साथियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो और पीड़ित को न्याय मिले।
हमिरपुर में पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में की शिकायत, हिस्ट्रीशीटर पर झूठा मुकदमा दर्ज कराने का आरोप

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