हमीरपुर जिले के कुरारा क्षेत्र में एक गंभीर सुरक्षा और बुनियादी ढांचे का मुद्दा सामने आया है। स्थानीय ग्रामीणों ने अपने घरों के ठीक ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन बिजली लाइन को हटाने की मांग को लेकर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। यह मांग हाल ही में जनसुनवाई पोर्टल और समाधान दिवस के माध्यम से अधिकारियों के समक्ष रखी गई है। इस समस्या के समाधान के लिए ग्रामीणों ने राज्य सरकार की जनसुनवाई प्रणाली का सहारा लिया है, ताकि इस जानलेवा स्थिति से जल्द से जल्द छुटकारा पाया जा सके। इस मामले ने स्थानीय प्रशासन के लिए एक नई चुनौती खड़ी कर दी है, जिसे प्राथमिकता के आधार पर हल करने की आवश्यकता है। इस समस्या का मुख्य केंद्र कुरारा गांव का एक विशेष आवासीय क्षेत्र है, जहां बिजली विभाग द्वारा स्थापित हाईटेंशन लाइनें सीधे लोगों के घरों के ऊपर से गुजर रही हैं। इन तारों की ऊंचाई बेहद कम होने के कारण किसी भी समय एक बड़ी दुर्घटना घटित हो सकती है। विशेषकर तेज हवा, बारिश या आंधी-तूफान के दौरान इन तारों के टूटने का खतरा हमेशा बना रहता है। इसके अलावा, इन तारों के संपर्क में आने से शॉर्ट सर्किट होने और आग लगने की आशंका भी बनी रहती है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह स्थिति उनके दैनिक जीवन और परिवार की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि इस समस्या का स्थायी समाधान निकालना अब प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इस गंभीर समस्या के समाधान हेतु ग्रामीणों ने जिला प्रशासन के समक्ष कई बार अपनी बात रखी है। उन्होंने मांग की है कि जनसुनवाई पोर्टल के माध्यम से इस मामले को दर्ज किया जाए और संबंधित विभागों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए जाएं। इसके साथ ही, उन्होंने हर शनिवार को आयोजित होने वाले समाधान दिवस में भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। समाधान दिवस के दौरान अधिकारियों के समक्ष अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए ग्रामीणों ने बताया कि कैसे यह बिजली लाइन उनके लिए एक अभिशाप साबित हो रही है। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि जल्द से जल्द कोई ठोस कदम उठाया जाए, अन्यथा किसी बड़े हादसे के लिए विभाग जिम्मेदार होगा। ग्रामीणों की इस पहल को स्थानीय स्तर पर व्यापक समर्थन मिल रहा है। जनसुनवाई पोर्टल का उपयोग करते हुए ग्रामीणों ने अपनी शिकायत को डिजिटल रूप में दर्ज कराया है। इस पोर्टल के माध्यम से की गई शिकायत में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि हाईटेंशन लाइन को सुरक्षित दूरी पर स्थानांतरित करने के लिए तकनीकी सर्वेक्षण की आवश्यकता है। शिकायत में यह भी मांग की गई है कि संबंधित बिजली विभाग के अधिकारियों को मौके पर भेजकर स्थिति का जायजा लिया जाए। जनसुनवाई पोर्टल पर की गई इस शिकायत के बाद अब यह मामला सीधे तौर पर जिला प्रशासन के रडार पर आ गया है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जल्द ही उचित कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि केवल मौखिक आश्वासन से काम नहीं चलेगा और उन्हें लिखित रूप में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। समाधान दिवस के मंच से भी ग्रामीणों ने अपनी आवाज बुलंद की है। इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों के समक्ष उन्होंने विस्तार से अपनी समस्या को रखा और समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया। समाधान दिवस में कई अन्य स्थानीय समस्याएं भी सामने आई हैं, लेकिन हाईटेंशन लाइन का मुद्दा सबसे अधिक संवेदनशील और खतरनाक माना जा रहा है। ग्रामीणों ने समाधान दिवस में मांग की कि बिजली विभाग के उच्चाधिकारियों को मौके पर भेजकर तारों की ऊंचाई और उनकी स्थिति का आकलन किया जाए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि तारों को हटाना संभव नहीं है, तो कम से कम उनकी ऊंचाई को इतना बढ़ा दिया जाए जिससे किसी भी प्रकार की दुर्घटना की गुंजाइश समाप्त हो सके। समाधान दिवस में अधिकारियों ने इस मांग पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया है। प्रशासन और बिजली विभाग के समक्ष अब यह स्पष्ट है कि इस समस्या का समाधान केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए। हाईटेंशन लाइन को हटाने या सुरक्षित दूरी पर स्थानांतरित करने की प्रक्रिया में तकनीकी और वित्तीय चुनौतियां आ सकती हैं, लेकिन लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि है। कुरारा के ग्रामीणों ने अपनी दृढ़ता दिखाते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि वे इस मुद्दे पर तब तक शांत नहीं बैठेंगे जब तक कि कोई ठोस और स्थायी समाधान नहीं निकाला जाता। जनसुनवाई पोर्टल और समाधान दिवस के माध्यम से की गई उनकी यह मांग अब एक व्यापक जन-आंदोलन का रूप ले चुकी है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन और बिजली विभाग के अगले कदमों पर टिकी हैं, ताकि इस जानलेवा स्थिति से जल्द से जल्द मुक्ति मिल सके और ग्रामीणों को सुरक्षित माहौल मिल सके।