पीलीभीत में हाल ही में हुए बूंदीभूड़ कांड के विरोध में एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और बड़ी संख्या में महिलाओं सहित एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला मुख्यालय की ओर बढ़ने का प्रयास किया, ताकि प्रशासन के समक्ष अपना असंतोष व्यक्त कर सकें। हालांकि, प्रशासन ने इस समूह को पीलीभीत-मिश्रिख सीमा पर ही रोक दिया, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। यह कदम उस घटना के बाद उठाया गया है, जिसे स्थानीय स्तर पर 'बूंदीभूड़ कांड' के रूप में जाना जाता है। इस घटना के कारण पूरे जिले में भारी आक्रोश व्याप्त है। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि यह घटना उनके साथ हुए अन्याय का परिणाम है और वे इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। सीमा पर रोके जाने के बाद, कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन के इस कदम की निंदा की है। उन्होंने कहा कि यह लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है और वे अपनी आवाज उठाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। महिलाओं की उपस्थिति ने इस विरोध प्रदर्शन में एक नया आयाम जोड़ दिया है, क्योंकि वे इस मामले में न्याय की मांग कर रही हैं। प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन यह स्पष्ट है कि बूंदीभूड़ कांड ने राजनीतिक हलकों में काफी हलचल मचा दी है। पीलीभीत में राजनीतिक वातावरण काफी गर्म हो गया है और प्रशासन पर इस पूरे मामले को सुलझाने का दबाव बढ़ रहा है। कांग्रेस पार्टी ने इस घटना को राज्य सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में पेश किया है।