इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक गंभीर टिप्पणी में राममंदिर के लिए चढ़ावा चोरी को नैतिक पतन की पराकाष्ठा बताया है। न्यायालय की पीठ ने इस घटना को न केवल एक कानूनी अपराध, बल्कि समाज के नैतिक ताने-बाने पर एक प्रहार के रूप में देखा है। न्यायालय ने इस बात पर बल दिया कि भक्तों द्वारा अर्पित की गई धनराशि और चढ़ावा केवल धन नहीं, बल्कि उनकी श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है, और इसके साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ एक गंभीर अपराध है। न्यायालय ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए केंद्र और राज्य सरकार को आवश्यक कानूनी संशोधन करने का निर्देश दिया है।