लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक यादव का आज लखनऊ में निधन हो गया। अस्पताल के अधिकारियों द्वारा आधिकारिक तौर पर उन्हें मृत घोषित किया गया। प्रतीक यादव, जो 38 वर्ष के थे, लंबे समय से बीमार थे। उनके निधन की खबर से उनके परिवार और राजनीतिक समर्थकों में शोक की लहर दौड़ गई है। प्रतीक यादव, जो अपने बड़े भाई अखिलेश यादव के साथ राजनीतिक विरासत साझा करते थे, उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक जाना-माना नाम थे। उनके नाम के साथ 'बीजेपी' का उल्लेख किया गया था, जो उनके राजनीतिक झुकाव को दर्शाता है। प्रतीक यादव ने अपने राजनीतिक करियर के दौरान कई बार चुनाव भी लड़ा था, हालांकि उनके चुनावी रिकॉर्ड और राजनीतिक प्रभाव के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई थी। वे अपने पीछे पत्नी अपर्णा और अन्य करीबी परिवार के सदस्यों को छोड़ गए हैं। अस्पताल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की कि प्रतीक यादव को गंभीर बीमारी के कारण भर्ती कराया गया था, लेकिन उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। अस्पताल के चिकित्सा कर्मचारियों ने बताया कि उनकी मृत्यु हो गई है। यह घटना उस समय हुई जब राजनीतिक परिवार शोक की इस घड़ी में है, क्योंकि हाल ही में समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव का भी निधन हो चुका है। प्रतीक यादव का जाना उनके परिवार के लिए एक बड़ा व्यक्तिगत और राजनीतिक आघात है। अखिलेश यादव ने अपने भाई के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि प्रतीक यादव उनके सबसे करीबी साथी थे और उनके बिना राजनीतिक रूप से अधूरे हैं। इस खबर ने समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं में भी शोक की लहर पैदा कर दी है। प्रतीक यादव का राजनीतिक सफर भले ही छोटा रहा हो, लेकिन उनके परिवार और समाज के लिए उनका महत्व हमेशा रहेगा। प्रतीक यादव की अंतिम यात्रा और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है। उनके परिवार के सदस्य शोक में डूबे हुए हैं और वे इस व्यक्तिगत क्षति को सहने की शक्ति की प्रार्थना कर रहे हैं। प्रतीक यादव के निधन की खबर ने राजनीतिक हलकों में भी चर्चा पैदा कर दी है, क्योंकि उनकी राजनीतिक पहचान और भविष्य की योजनाओं के बारे में अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, प्रतीक यादव के जीवन और मृत्यु के बारे में केवल आधिकारिक घोषणाएं ही की गई हैं।