*शिवांगी द्विवेदी*
शिक्षकों को राहत नहीं, एक साल की अतिरिक्त मोहलत; 1.86 लाख से अधिक शिक्षक होंगे प्रभावित
नई दिल्ली/लखनऊ। देशभर के लाखों शिक्षकों और शिक्षक अभ्यर्थियों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करना अनिवार्य रहेगा। अदालत ने टीईटी की अनिवार्यता में किसी भी प्रकार की छूट देने से साफ इनकार कर दिया है। हालांकि कार्यरत शिक्षकों को राहत देते हुए टीईटी उत्तीर्ण करने की समयसीमा में एक वर्ष की वृद्धि कर दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने और विद्यार्थियों को योग्य शिक्षक उपलब्ध कराने के लिए टीईटी जैसी पात्रता परीक्षा आवश्यक है। इसलिए इसे समाप्त करने या इसमें व्यापक छूट देने की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती।
अदालत ने पहले निर्धारित 31 मार्च 2027 की समयसीमा को बढ़ाकर 31 मार्च 2028 कर दिया है। इस फैसले से उन शिक्षकों को कुछ राहत मिली है जो अभी तक टीईटी पास नहीं कर सके हैं, लेकिन अब उन्हें अतिरिक्त एक वर्ष के भीतर परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी।
खबर के अनुसार, सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्णय दिया था कि शिक्षक नियुक्ति के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। इस आदेश से देशभर के लाखों शिक्षक प्रभावित हुए थे और कई शिक्षकों ने अपनी सामान्य आजीविका पर संकट की बात कहते हुए राहत की मांग की थी।
अदालत ने यह भी कहा कि जिन शिक्षकों के पास अब तक टीईटी पास करने का पर्याप्त समय नहीं था, उन्हें एक अंतिम अवसर दिया जा रहा है। विशेष रूप से 1 से 8वीं कक्षा तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए यह पात्रता परीक्षा अनिवार्य बनी रहेगी।
उत्तर प्रदेश में इस फैसले का व्यापक असर देखने को मिल सकता है। विभिन्न शिक्षक संगठनों के अनुसार प्रदेश में लगभग 1.86 लाख से अधिक शिक्षक इस निर्णय से प्रभावित होंगे। शिक्षक संगठनों ने फैसले पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि बड़ी संख्या में शिक्षक वर्षों से सेवा दे रहे हैं और उनके हितों की भी रक्षा की जानी चाहिए।
वहीं, अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ सहित कई संगठनों ने केंद्र सरकार से इस मामले में पुनर्विचार करने और प्रभावित शिक्षकों को अतिरिक्त राहत देने की मांग की है। संगठनों का कहना है कि टीईटी की अनिवार्यता लागू करने से पहले कार्यरत शिक्षकों की परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि देश में शिक्षक बनने के लिए निर्धारित योग्यता और पात्रता मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा। हालांकि एक वर्ष की अतिरिक्त मोहलत मिलने से हजारों शिक्षकों को तैयारी का अवसर अवश्य मिल गया है, लेकिन अब टीईटी पास किए बिना नौकरी बचाए रखना संभव नहीं होगा।