वेण्डर विकास कार्यक्रम में GeM, गुणवत्ता, तकनीकी मानकों और सरकारी खरीद प्रक्रिया पर विशेषज्ञों ने दी जानकारी
लखनऊ, 20 अगस्त। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार के एमएसएमई-विकास कार्यालय, कानपुर एवं PHDCCI, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को पीएचडी हाउस, गोमती नगर में दो दिवसीय “सूक्ष्म एवं लघु इकाइयों के लिए वेण्डर विकास कार्यक्रम-2026” का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में एमएसएमई उद्यमियों को सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) में वेण्डर पंजीकरण, सरकारी खरीद प्रक्रिया, GeM, गुणवत्ता, तकनीकी मानकों और कारोबारी अवसरों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का उद्घाटन एमएसएमई-विकास कार्यालय, कानपुर के निदेशक वी.के. वर्मा, IEDS के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने कहा कि सरकारी खरीद में एमएसई की भागीदारी बढ़ाने के लिए 25 प्रतिशत खरीद का लक्ष्य निर्धारित है। एससी, एसटी और महिला उद्यमियों के लिए भी विशेष प्रावधान हैं। एमएसई को विभिन्न संस्थानों की वेण्डर पंजीकरण और खरीद प्रक्रिया को समझकर इन अवसरों का लाभ उठाना चाहिए।
मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार के सचिव, एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन प्रांजल यादव, IAS ने कहा कि प्रदेश के औद्योगिक तंत्र में एमएसएमई की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। राज्य में प्रत्येक 100 उद्योगों में 98 से अधिक एमएसएमई हैं, जबकि करीब 90 प्रतिशत इकाइयां सूक्ष्म उद्यम हैं। उन्होंने युवाओं से उद्यमिता की ओर आगे बढ़ने का आह्वान करते हुए औद्योगिक भूखंड, वित्त, सब्सिडी और प्रोत्साहन जैसी जरूरतों पर ध्यान देने की बात कही।
उन्होंने कहा कि GeM पर एमएसई की हिस्सेदारी करीब 45 प्रतिशत है और लगभग नौ लाख करोड़ रुपये की खरीद एमएसई से हुई है। TReDS के जरिए ऑर्डर और चालान के आधार पर एमएसई अपने भुगतान के लिए वित्त प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने उद्यमियों से GeM, TReDS और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध अवसरों की नियमित जानकारी लेने की अपील की।
GeM पर करीब 20 लाख करोड़ की खरीद
GeM के यूपी स्टेट नोडल एवं डिप्टी सीईओ कृष्ण मुरारी, IRSS ने बताया कि वर्ष 2017 में लॉन्च होने के बाद GeM पर करीब 20 लाख करोड़ रुपये की खरीद हो चुकी है। इसमें एमएसई की हिस्सेदारी लगभग 45 प्रतिशत यानी करीब नौ लाख करोड़ रुपये है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा भी करीब एक लाख करोड़ रुपये की खरीद की गई है। उन्होंने विक्रेताओं के पोर्टल पर पंजीकरण और सरकारी खरीद प्रक्रिया से संबंधित जानकारी साझा की।
रेलवे, HAL, Power Grid और ALIMCO में अवसर
RDSO के कार्यकारी निदेशक, स्टोर्स अकमल वदूद ने कहा कि लखनऊ और आसपास का रेलवे तंत्र एमएसई के लिए बड़े अवसर उपलब्ध कराता है। आधुनिक कोच फैक्टरी, रायबरेली में करीब 7,000 से 8,000 करोड़ रुपये की खरीद होती है। उन्होंने मशीनरी एवं प्लांट उपकरण के क्षेत्र में एमएसई के लिए संभावनाएं रेखांकित कीं।
ALIMCO, कानपुर के डीजीएम (MM & Project) आलोक ठाकुर ने बताया कि कानपुर संयंत्र करीब 45 एकड़ में फैला है और लगभग 50-60 प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं के साथ काम करता है। उन्होंने एमएसई से ALIMCO की जरूरतों को समझकर अपनी उत्पादन क्षमता विकसित करने का आह्वान किया।
Power Grid Corporation of India Limited, Northern Region-III के वरिष्ठ महाप्रबंधक गिरिश गुप्ता ने बताया कि ट्रांसफॉर्मर, रिएक्टर, इंसुलेटर और छोटे तकनीकी उपकरणों के साथ मैनपावर, हॉर्टिकल्चर, गेस्ट हाउस, फिटिंग एवं रखरखाव सेवाओं में भी एमएसई के लिए अवसर हैं। उन्होंने बताया कि Northern Region में करीब 70 प्रतिशत खरीद एमएसई से की जा रही है।
HAL लखनऊ के डीजीएम, आउटसोर्सिंग प्रमोद बरनवाल ने कहा कि HAL लखनऊ में आउटसोर्सिंग में करीब 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। सक्षम एमएसई के लिए गुणवत्ता और समयबद्ध आपूर्ति सबसे महत्वपूर्ण हैं। गुणवत्तापूर्ण उत्पाद समय पर उपलब्ध कराने से HAL और एमएसई दोनों को लाभ होता है।
गुणवत्ता और पैकेजिंग पर भी जोर
तकनीकी सत्र में Bureau of Indian Standards के जितेन्द्र कुमार ने Marketing, Technology & Quality पर प्रस्तुतीकरण दिया और गुणवत्ता एवं मानकीकरण के महत्व को रेखांकित किया। Indian Institute of Packaging, Lucknow के प्रो. अंशुमान श्रीवास्तव ने कहा कि बेहतर पैकेजिंग उत्पाद की सुरक्षा के साथ उसकी पहचान, प्रस्तुति और बाजार में स्वीकार्यता को भी प्रभावित करती है। मानक अनुरूप आधुनिक पैकेजिंग से एमएसई के उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ सकती है।
पीएसयू-एमएसई के बीच सीधा संवाद
कार्यक्रम के प्रथम दिवस के अंतिम सत्र में B2B Meet एवं PSUs-MSMEs Interaction आयोजित हुआ। इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के प्रतिनिधियों और एमएसई उद्यमियों के बीच खरीद आवश्यकताओं, तकनीकी मानकों, वेण्डर पंजीकरण और संभावित कारोबारी सहयोग पर सीधा संवाद हुआ।
कार्यक्रम में लखनऊ के विभिन्न औद्योगिक संगठनों के 200 से अधिक पदाधिकारी एवं प्रतिनिधि, एमएसएमई इकाइयों के उद्यमी तथा विभिन्न सरकारी एवं सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यक्रम में 20 से अधिक स्टॉल लगाए गए, जिनमें एमएसएमई और पीएसयू ने अपने उत्पादों, सेवाओं, तकनीकों एवं उपलब्धियों का प्रदर्शन किया।
PHDCCI के यूपी स्टेट चैप्टर के को-चेयर एवं Technical KARAM Group के प्रेसिडेंट राजेश निगम ने कहा कि यह कार्यक्रम एमएसएमई को पीएसयू के साथ सीधे संवाद और कारोबारी अवसर समझने का महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने उद्यमियों से बदलती सरकारी नीतियों, नियमों और खरीद प्रक्रियाओं के प्रति अपडेट रहने की अपील की।
कार्यक्रम का संचालन एमएसएमई-डीएफओ, कानपुर के सहायक निदेशक अमित बाजपेयी, FIEO के क्षेत्रीय प्रमुख आलोक श्रीवास्तव सहित अन्य अधिकारियों ने किया। प्रथम दिवस के समापन पर एमएसएमई-डीएफओ, कानपुर के सहायक निदेशक नीरज कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

