28 वर्षों की सेवा में कानून व्यवस्था, मानवता और मित्र पुलिस की मिसाल बने हनुमंत विहार चौकी इंचार्ज

कानपुर नगर।

पुलिस प्रहरी समाचार पत्र का सदैव यह प्रयास रहता है कि समाज और पुलिस के बीच सकारात्मक संवाद स्थापित हो तथा पुलिस विभाग के उन अधिकारियों और कर्मचारियों के कार्यों को सामने लाया जाए, जो अपनी जिम्मेदारियों को केवल ड्यूटी नहीं बल्कि सेवा और समर्पण का माध्यम मानते हैं। इसी क्रम में हनुमंत विहार थाना क्षेत्र अंतर्गत हनुमंत विहार चौकी में तैनात चौकी इंचार्ज अरविंद सिंह से विशेष बातचीत की गई।

करीब 28 वर्षों से पुलिस विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे चौकी इंचार्ज अरविंद सिंह ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि पुलिस सेवा उनके लिए केवल सरकारी नौकरी नहीं, बल्कि समाज की सुरक्षा और लोगों के विश्वास की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि उनके पिता भी इसी विभाग में रहे, जिससे बचपन से ही अनुशासन, सेवा और कर्तव्यनिष्ठा के संस्कार मिले। यही कारण है कि उन्होंने परिवार की जिम्मेदारियों के साथ-साथ पुलिस विभाग की जिम्मेदारियों को भी पूरे मन और ईमानदारी से निभाने का प्रयास किया।

उन्होंने बताया कि इतने लंबे कार्यकाल में उन्हें समाज के विभिन्न पहलुओं को बहुत करीब से समझने और सीखने का अवसर मिला। अपराधियों और सामान्य नागरिकों के प्रति पुलिस का दृष्टिकोण अलग होता है। सज्जन और कानून का पालन करने वाले नागरिकों की सुरक्षा पुलिस की प्राथमिकता होती है, जबकि अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करना पुलिस का दायित्व है।

“हर क्षेत्र की कानून व्यवस्था के लिए अलग रणनीति जरूरी”

अरविंद सिंह ने बताया कि जिस क्षेत्र की जिम्मेदारी उन्हें दी जाती है, वहां की परिस्थितियों और अपराध की प्रवृत्ति को समझकर वह अपनी कार्ययोजना तैयार करते हैं। साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दिए गए निर्देशों का पूरी निष्ठा से पालन करते हुए क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास करते हैं।

उन्होंने कहा कि पुलिस की सफलता केवल अपराधियों की गिरफ्तारी में नहीं, बल्कि आम नागरिकों में सुरक्षा और विश्वास की भावना पैदा करने में भी होती है।

“मित्र पुलिस की भावना को समझने की जरूरत”

जब उनसे पूछा गया कि आम लोगों और पुलिस के बीच दूरी क्यों महसूस होती है, तो उन्होंने बेहद सहजता से कहा कि एक सामान्य और सज्जन व्यक्ति अपने परिवार और रोजमर्रा के जीवन में व्यस्त रहता है। यदि उसे किसी कारणवश थाने या चौकी जाना पड़े तो वह स्वाभाविक रूप से घबराहट महसूस करता है। वहीं अपराधी मानसिकता के लोग पुलिस तंत्र से परिचित होते हैं, इसलिए उनमें वैसा डर नहीं होता।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि पुलिस विभाग का उद्देश्य किसी निर्दोष व्यक्ति को परेशान करना नहीं है। पुलिस चाहती है कि समाज के संभ्रांत और ईमानदार लोग पुलिस को अपना मित्र समझें और किसी भी समस्या या सूचना को साझा करने में संकोच न करें। “मित्र पुलिस” की अवधारणा तभी सफल होगी जब जनता और पुलिस दोनों के बीच विश्वास मजबूत होगा।

“ईश्वर ने जो जिम्मेदारी दी, उससे पूरी तरह संतुष्ट हूं”

अपने पेशे को लेकर संतुष्टि के प्रश्न पर चौकी इंचार्ज अरविंद सिंह ने कहा कि ईश्वर ने उन्हें जो जिम्मेदारी दी है, वह उससे पूरी तरह संतुष्ट हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस सेवा ने उन्हें लोगों को समझने, समाज के विभिन्न पहलुओं को देखने और सही मार्गदर्शन देने का अवसर दिया। उनका मानना है कि पुलिसकर्मी का स्वभाव केवल कठोर नहीं होना चाहिए, बल्कि एक शिक्षक की तरह भी होना चाहिए, जो लोगों को सही और गलत का अंतर समझा सके

“कठोरता अपराधियों के लिए, संवेदनशीलता आम जनता के लिए — यही है सच्ची मित्र पुलिस की पहचान।”