भाजपा की बैठक बीच में छोड़कर निकले पांच पार्षद, अनुशासन पर उठे सवाल; तिरंगा यात्रा से पहले संगठन में बढ़ी हलचल
कानपुर।
स्वतंत्रता दिवस से पहले प्रस्तावित तिरंगा यात्रा की तैयारियों को लेकर बुधवार शाम प्रमिला सभागार में भाजपा की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में क्षेत्रीय अध्यक्ष, महापौर, दोनों जिलाध्यक्षों सहित पार्टी के सभी पार्षद मौजूद थे। तिरंगा यात्रा की रूपरेखा पर चर्चा शुरू ही हुई थी कि अचानक पार्टी के पांच बागी पार्षद बैठक छोड़कर बाहर चले गए।
बैठक से बाहर जाने वाले पार्षदों में विकास जायसवाल, पवन गुप्ता, लक्ष्मी कोरी, आलोक पांडेय और निक्कू तिवारी शामिल रहे। उनके अचानक बैठक छोड़ने से सभागार में मौजूद पदाधिकारियों और पार्षदों के बीच चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।
सूत्रों के अनुसार, पार्टी के अंदर इस घटनाक्रम को अनुशासनहीनता के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि बैठक छोड़ने के पीछे इन पार्षदों की ओर से कोई आधिकारिक कारण सामने नहीं आया है। संगठन स्तर पर भी इस पूरे घटनाक्रम को लेकर मंथन शुरू हो गया है।
तिरंगा यात्रा जैसे राष्ट्रीय गौरव से जुड़े कार्यक्रम के बीच हुई इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक मतभेद और संगठनात्मक नाराजगी अपनी जगह हो सकती है, लेकिन राष्ट्रीय ध्वज और देश के सम्मान से जुड़े आयोजनों में सभी जनप्रतिनिधियों की एकजुटता की अपेक्षा की जाती है।
बड़ा सवाल...
क्या आपसी मनमुटाव और गुटबाजी तिरंगे से भी बड़ी हो सकती है?
देश के सम्मान और राष्ट्रभक्ति के प्रतीक तिरंगे के प्रति राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सभी दलों और जनप्रतिनिधियों को एकजुट होने का संदेश देना समय की मांग है। तिरंगा किसी दल का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की अस्मिता और सम्मान का प्रतीक है। ऐसे में तिरंगा यात्रा जैसे आयोजनों में व्यक्तिगत या राजनीतिक नाराजगी से ऊपर उठकर सहभागिता ही लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रभक्ति का परिचायक मानी जाती है।
तिरंगा यात्रा की बैठक से उठे 5 बागी पार्षद, क्या राष्ट्र सम्मान से ऊपर है नाराजगी?


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