
न्यू कानपुर सिटी का सपना हो रहा साकार, किसानों के चेहरों पर लौटी मुस्कान
21 काश्तकारों को मिले 7.51 करोड़ रुपये, आपसी सहमति से भूमि क्रय की प्रक्रिया तेज
कानपुर। न्यू कानपुर सिटी परियोजना को धरातल पर उतारने की दिशा में कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) ने एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। परियोजना के लिए 21 काश्तकारों से लगभग 1.9 हेक्टेयर भूमि का क्रय करते हुए उन्हें कुल 7 करोड़ 51 लाख 77 हजार 300 रुपये की धनराशि के डिमांड ड्राफ्ट वितरित किए गए। भुगतान प्राप्त करने के बाद किसानों के चेहरों पर संतोष और खुशी साफ दिखाई दी।
उपाध्यक्ष अंकुर कौशिक एवं सचिव अभय कुमार पाण्डेय के निर्देशन में भूमि बैंक अनुभाग तथा न्यू कानपुर सिटी परियोजना के नोडल अधिकारी एवं विशेष कार्याधिकारी/उप जिलाधिकारी डॉ. रवि प्रताप सिंह की देखरेख में यह कार्यवाही संपन्न हुई। भूमि का मूल्यांकन सर्किल दर के चार गुना के आधार पर किया गया, जिससे किसानों को उनकी जमीन का बेहतर प्रतिफल प्राप्त हुआ।
डिमांड ड्राफ्ट प्राप्त करने के बाद काश्तकारों ने पूरी प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और सम्मानजनक बताते हुए केडीए अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सराहना की तथा उनका आभार व्यक्त किया। किसानों का कहना था कि उन्हें समयबद्ध और सहज तरीके से भुगतान मिलने से परियोजना के प्रति उनका विश्वास और मजबूत हुआ है।
केडीए ने जानकारी दी कि अगले तीन दिनों में 19 अन्य काश्तकारों से लगभग 1.7 हेक्टेयर भूमि का क्रय किया जाएगा। इसके लिए 4 करोड़ 31 लाख रुपये की धनराशि के डिमांड ड्राफ्ट और चेक पहले ही तैयार किए जा चुके हैं तथा बैनामों के लिए ऑनलाइन टोकन की प्रक्रिया जारी है।
डॉ. रवि प्रताप सिंह ने बताया कि न्यू कानपुर सिटी परियोजना के लिए अब तक आपसी सहमति के आधार पर बड़ी मात्रा में भूमि क्रय की जा चुकी है, जिसके एवज में किसानों को लगभग 392 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। यह परियोजना न केवल शहर के भविष्य को नई दिशा देगी, बल्कि क्षेत्र के विकास और रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगी।
इसके साथ ही 55.0709 हेक्टेयर भूमि के अर्जन की समानांतर प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है। संबंधित आख्या जिलाधिकारी एवं अपर जिलाधिकारी (भूमि अध्याप्ति) द्वारा शासन को भेजी जा चुकी है तथा भूमि अर्जन अधिनियम के तहत आवश्यक कार्यवाही प्रगति पर है।
न्यू कानपुर सिटी परियोजना के लिए हो रही यह पहल विकास और विश्वास का ऐसा संगम बन रही है, जहां एक ओर शहर के विस्तार का सपना आकार ले रहा है, वहीं दूसरी ओर किसानों को उनकी भूमि का सम्मानजनक और उचित प्रतिफल भी मिल रहा है।

