हर गली, हर नुक्कड़ पर बिक रहा राष्ट्रीय ध्वज, लेकिन क्या हम उसके सम्मान को लेकर उतने ही सजग हैं?

15 अगस्त आते ही देशभक्ति का वातावरण दिखाई देने लगता है। बाजारों से लेकर गलियों और चौराहों तक तिरंगा बिकता नजर आता है। बच्चे, युवा और आम नागरिक बड़े उत्साह के साथ अपने घरों, दुकानों और प्रतिष्ठानों पर राष्ट्रीय ध्वज लगाते हैं। यह दृश्य निश्चित रूप से गौरव का विषय है, लेकिन इसी के साथ एक सवाल भी खड़ा होता है—क्या हम तिरंगे को केवल खरीदने और लगाने तक सीमित कर रहे हैं या उसके सम्मान की जिम्मेदारी भी समझ रहे हैं?

हमारी परंपरा और राष्ट्रीय भावना यह कहती है कि तिरंगा हमेशा सम्मान के साथ सीधा और गरिमापूर्ण ढंग से फहरना चाहिए। राष्ट्रीय ध्वज को यूं ही कहीं भी टांग देना, उसे जमीन से छूने देना, उल्टा या टेढ़ा लगाना अथवा ऐसी जगह लगाना जहां वह असम्मानजनक स्थिति में दिखाई दे, निश्चित रूप से चिंता का विषय है।

विशेष रूप से ध्यान देने वाली बात यह है कि जो लोग तिरंगे बेचते हैं, उनकी भी जिम्मेदारी कम नहीं है। कई स्थानों पर झंडे अलग-अलग आकार, डिजाइन और तरीके से बेचे जाते दिखाई देते हैं। कहीं तिरंगा सीधा है तो कहीं उसे इस तरह तैयार किया गया है कि लगाने पर वह टेढ़ा या उलझा हुआ दिखाई देता है। दुकानदारों और विक्रेताओं को भी समझना होगा कि वे कोई सामान्य वस्तु नहीं बेच रहे, बल्कि देश की पहचान और सम्मान का प्रतीक नागरिकों तक पहुंचा रहे हैं।

हमारे लिए तिरंगा केवल तीन रंगों का कपड़ा नहीं है। इसके प्रत्येक रंग और बीच का अशोक चक्र देश के संघर्ष, त्याग, शांति, साहस और निरंतर आगे बढ़ने की भावना का प्रतीक हैं। स्वतंत्रता सेनानियों ने जिस आजादी के लिए अपना जीवन समर्पित किया, उसी आजादी की पहचान हमारे हाथों में तिरंगे के रूप में है।

राष्ट्रीय शोक जैसी विशेष परिस्थितियों में ही ध्वज को निर्धारित नियमों के अनुसार झुकाया जाता है। इसलिए सामान्य दिनों में तिरंगे को सम्मानपूर्वक ऊंचा और सही स्थिति में रखना हमारी जिम्मेदारी है।

इस स्वतंत्रता दिवस पर संकल्प केवल तिरंगा खरीदने का नहीं, बल्कि उसे सही तरीके से लगाने और पूरे सम्मान के साथ रखने का होना चाहिए।

क्योंकि तिरंगा घर की छत पर लगा हो या किसी दुकान के बाहर—
उसकी ऊंचाई से ज्यादा महत्वपूर्ण है उसके प्रति हमारे मन में मौजूद सम्मान।

तिरंगे का सम्मान करें, देश का सम्मान करें।
जय हिंद! Surya pandey