कानपुर नगर। जनपद के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने और मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिलाधिकारी ने मंगलवार सुबह उर्सला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। प्रातः करीब 9:30 बजे किए गए इस निरीक्षण में प्रशासनिक सख्ती साफ दिखाई दी। जिलाधिकारी के साथ एडीएम सिटी भी मौजूद रहे।

निरीक्षण के दौरान अस्पताल परिसर में अव्यवस्थाओं और लापरवाही की कई तस्वीरें सामने आईं। डीएम ने अस्पताल में सक्रिय दो संदिग्ध दलालों को मौके पर पकड़ लिया, जो मरीजों और तीमारदारों को गुमराह कर निजी जांच व बाहरी दवाओं के लिए प्रेरित कर रहे थे। जिलाधिकारी ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए सीएमएस उर्सला को निर्देश दिए कि अस्पताल परिसर में ऐसे संदिग्ध व्यक्तियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाए और किसी भी प्रकार की दलाली को बर्दाश्त न किया जाए।

औचक निरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में स्वास्थ्यकर्मी अनुपस्थित पाए गए। जांच में 22 डॉक्टरों सहित कुल 32 कर्मचारी ड्यूटी से गैरहाजिर मिले। जिलाधिकारी ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए सभी अनुपस्थित कर्मियों का एक दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए। साथ ही स्पष्ट चेतावनी दी कि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही मिलने पर और कठोर कार्रवाई की जाएगी।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने ओपीडी, दवा वितरण केंद्र, वार्डों और अस्पताल की साफ-सफाई व्यवस्था का भी जायजा लिया। उन्होंने मरीजों से सीधे बातचीत कर इलाज, दवाओं और अस्पताल की सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। कई मरीजों ने अस्पताल में बाहरी दवा लिखे जाने और दलालों की सक्रियता की शिकायत भी की।

इस पर जिलाधिकारी ने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी परिस्थिति में मरीजों को बाहर की दवा न लिखी जाए। सरकारी अस्पताल में उपलब्ध दवाओं से ही मरीजों का उपचार सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि गरीब और जरूरतमंद मरीज सरकारी अस्पतालों पर भरोसा करके आते हैं, इसलिए उनकी सुविधा और उपचार में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

डीएम की इस कार्रवाई से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। प्रशासन की इस सख्ती को सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था सुधारने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।