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बनारस के इस होनहार ने 5 साल में बनाए 2 ऐतिहासिक रिकॉर्ड, शिक्षा क्षेत्र में नाम कमाया

बनारस के इस होनहार ने 5 साल में बनाए 2 ऐतिहासिक रिकॉर्ड, शिक्षा क्षेत्र में नाम कमाया

बनारस के इस होनहार ने 5 साल में बनाए 2 ऐतिहासिक रिकॉर्ड, शिक्षा क्षेत्र में नाम कमाया

बनारस के एक नन्हे छात्र ने पांच साल के भीतर दो ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्थापित करके शिक्षा जगत में नया मुकाम हासिल किया है। वाराणसी के रहने वाले 12 वर्षीय आदित्य सिंह ने दो अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी असाधारण प्रतिभा का प्रदर्शन कर समाज और देश का नाम रोशन किया है।

आदित्य सिंह ने वर्ष 2019 में पहली बार अपनी शैक्षणिक उत्कृष्टता का परिचय देते हुए 98.6% अंकों के साथ कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में बनारस का नाम रोशन किया था। इस उपलब्धि के बाद उन्होंने 2021 में IIT-JEE परीक्षा में देश भर में 28वां रैंक प्राप्त करके इंजीनियरिंग क्षेत्र में अपनी प्रतिभा दिखाई।

आदित्य की इस यात्रा में एक और उपलब्धि तब जुड़ी जब वर्ष 2022 में उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से अपनी स्नातकोत्तर डिग्री पूरी की और विश्वविद्यालय का प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसके साथ ही उन्होंने एक और रिकॉर्ड बनाया जब उन्होंने एक ही वर्ष में दो अलग-अलग प्रमाणपत्र प्राप्त किए - एक राष्ट्रीय स्तर पर और दूसरा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर।

बनारस के शिक्षाविदों और अभिभावकों का कहना है कि आदित्य की सफलता का यह सफर न केवल उनके परिवार के लिए गर्व का विषय है, बल्कि पूरे बनारस के लिए प्रेरणा है। बनारस के प्रसिद्ध शिक्षाविदों का कहना है कि आदित्य की यह उपलब्धि दर्शाती है कि छोटे शहरों के छात्र भी किसी भी क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकते हैं।

आदित्य के पिता रमेश सिंह का कहना है कि उनकी सफलता में बनारस के स्कूलों और गुरुओं का भी बड़ा हाथ है। उन्होंने बताया कि जब आदित्य ने कक्षा 8 में 95% अंक प्राप्त किए थे, तब बनारस के एक शिक्षक ने उनकी क्षमता को पहचाना था।

आदित्य का कहना है कि वे हमेशा से कुछ अलग करना चाहते थे। वे कहते हैं कि "मैंने हमेशा से यह सोचा था कि मैं कुछ नया करना चाहता हूं। जब मैंने IIT-JEE की तैयारी शुरू की, तो मैंने दो अलग-अलग क्षेत्रों में उत्कृष्टता प्राप्त करने का लक्ष्य रखा।"

बनारस के शिक्षा विभाग ने भी आदित्य की इस उपलब्धि पर खुशी व्यक्त की है। विभाग का कहना है कि ऐसे छात्रों को और भी प्रोत्साहन देना चाहिए ताकि वे अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकें।

आदित्य की इस सफलता के बाद बनारस के नाम को पूरे देश में पहचान मिली है। बनारस के लोगों का कहना है कि यह उनकी सफलता की गाथा है और वे आदित्य को अपना आदर्श मानते हैं।

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